हमारे आश्रम के बारे में
हमारी आध्यात्मिक आधारशिला
शिवोन्मेष आश्रम का मूल वैशिष्ट्य यह है कि यहाँ “खोज बाहर नहीं, भीतर” की जाती है। यह स्थान उस तत्त्व का अनुभव कराने का माध्यम है, जिसे कश्मीर शैव दर्शन में “चैतन्यमात्मा” कहा गया है—अर्थात् आत्मा ही चैतन्य है, और वही शिव है।
यहाँ की साधना पद्धति में निम्न गूढ़ तत्व निहित हैं:

स्पन्द का अनुभव
सम्पूर्ण सृष्टि एक सूक्ष्म दिव्य कम्पन (स्पन्द) है। ध्यान की गहन अवस्था में साधक इस दिव्य स्पन्द का अनुभव अपने भीतर करता है।

प्रत्यभिज्ञा (स्व की पहचान)
आश्रम साधक को स्मरण कराता है कि वह कोई साधारण जीव नहीं, बल्कि स्वयं शिवस्वरूप है। बन्धन केवल विस्मृति का परिणाम है।

अन्तश्चेतना का जागरण
यहाँ साधना का केन्द्र बाहरी आडम्बर नहीं, बल्कि भीतर की चेतना का जागरण है, जहाँ से वास्तविक परिवर्तन प्रारम्भ होता है।

गुरु-तत्त्व का महत्व
शिवोन्मेष आश्रम में गुरु केवल उपदेशक नहीं, बल्कि चेतना के द्वार खोलने वाले माध्यम होते हैं—जो साधक को उसके वास्तविक स्वरूप का बोध कराते हैं।
आश्रम का उद्देश्य
निष्कर्षतः
हमारी आध्यात्मिक आधारशिला

रुद्राभिषेक एवं महामृत्युञ्जय:-
भौतिक जीवन की विविध समस्याओं और स्वास्थ्य की प्रतिकूलता होने पर महाकाल क्षेत्र या मन्दिर परिसर अथवा आश्रम परिसर में स्थित शिवलिंग पर रुद्राभिषेक का कार्य करवाया जाता है जिसमें सुयोग्य वैदिक ब्राह्मणों के द्वारा विधि विधान से भगवान महादेव का पूजन और फिर रुद्राभिषेक सम्पन्न किया जाता है। कामनाओं के अनुरूप कभी जल से, कभी दुग्ध से, कभी घृत से, कभी गन्ने के रस से, कभी सरसों के तेल से(शत्रु पीड़ा से छुटकारा हेतु), कभी अन्नादि से एक ब्राह्मण या ग्यारह ब्राह्मणों द्वारा सम्पन्न किया जाता है।

महामृत्युञ्जय जाप:-
किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने पर महामृत्युञ्जय मन्त्र का जाप करवाया जाता है

ग्रहदोष निवारण:
साथ ही ग्रह पीड़ा के निवारण के लिए भगवान महाकाल के परिसर या फिर आश्रम जो कि महाकाल परिक्षेत्र में ही स्थित है, में नवग्रह शान्ति आदि का विधिवत आयोजन सुयोग्य वैदिक ब्राह्मणों द्वारा किया जाता है

पितृदोष या कालसर्पदोष पूजा:
यदि किसी की कुण्डली में पितृ दोष या कालसर्प दोष होता है तो उसकी शान्ति हेतु सुयोग्य वैदिक ब्राह्मणों के द्वारा विधिवत शान्ति पूजा सम्पन्न किया जाता है।

मंगलदोष पूजा:-
यदि किसी की कुण्डली में मंगलदोष विद्यमान है अथवा किसी जातक के दाम्पत्य जीवन में बहुत अधिक कलह है तो मंगलनाथ जी के मंदिर में मंगलदोष निवारण पूजन व मंगल मन्त्र का जाप विधि पूर्वक किया जाता है।

बगलामुखी पूजन व हवन:-
जीवन की विविध समस्याओं और राजनैतिक अभ्युदय अथवा शत्रु के द्वारा पीड़ित होने पर माता बगलामुखी की उपासना सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। आश्रम परिसर में स्थित माता बगलामुखी की प्रसन्नता और अपनी कामना पूर्ति हेतु पाठ व हवन भी किया जाता है।

प्रवचन व कथा:
सन्तान का सर्वोपरि कर्त्तव्य है कि उसके पूर्वजों की सद्गति हो उन्हें नरक न जाना पड़े, तभी उसका पुत्र कहलाना सार्थक होता है। वस्तुतः पुत्र वही है जो अपने पूर्वजों को पुम् नामक नरक से रक्षा करे। पितरों की सद्गति के लिए "श्रीमद्भागवत की कथा, श्रीमद्देवीभागवत की कथा और श्रीशिवमहापुराण की कथा प्रशस्त है। यदि आप कोई भी कथा करवाना चाहते हैं तो हमारे व्हाट्सएप नम्बर पर सम्पर्क करें।

ज्योतिषीय परामर्श:-
यदि आप अपनी कुण्डली के सन्दर्भ में विवाह, सन्तान, व्यापार, करियर इत्यादि से सम्बंधित कोई भी मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते हैं तो आप हमारे व्हाट्सएप नम्बर पर सम्पर्क कर सकते हैं।